टमाटर की खेती कैसे करें और उपयुक्त मिट्टी कौन सी है | Tamatar Ki Kheti |how to cultivate tomato

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भारतीय रसोई की एक खास पहचान है टमाटर, टमाटर के बिना तो रसोई को अधूरा माना जाता है तो आइए जानते हैं कैसे होती है सबके पसंदीदा Tamatar Ki Kheti

टमाटर की फसल पाला (ठंड) सहन नहीं कर सकती है। इस लिए Tamatar Ki Kheti लिए उचित तापमान 18° से 27° डिग्री के बिच मे उपयुक्त रहता है। 21° से 24° डिग्री के बीच के तापमान पर टमाटर में लाल रंग सबसे अच्छा विकसित होता है। इन्हीं सब कारणों से सर्दियों में टमाटर सर्दियों में ज्यादा मीठे और गहरे लाल रंग के होते हैं। 38° डिग्री से ज्यादा तापमान होने पर अपरिपक्व फल एवं फूल गिर जाते हैं टमाटर की खेती के साथ आप अदरक की खेती भी कर सकते हैं

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Tamatar Ki Kheti एक ऐसी खेती है जो बहुत दिन तक सूखी रह सकती है परंतु अगर लगातार कई दिनों तक इसको सुखा रखा जाए और फिर एक दम से में पानी दिया जाए तो फसल खराब हो जाती है एक दम से पानी मिलने की वजह से टमाटर धीरे -धीरे फटने लग जाता है और इसके फूल के तने गलने लगते है. इसका तापमान ज्यादा या फिर एक दम से कम होने पर बीजों का अंकुरण कम हो जाता है.

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इस कारण टमाटर की फसल की पेदावार कम हो जाती है और फल फूल कमजोर हो कर गिरने लग जिता है और जल जाते है. उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों की मृदु जलवायु अंकुरण और बेहतरीन गुणवत्ता के फलों और फूलों के विकास और पकने के लिए उचित माना जाता है. लेकिन ज्यादा बारिश होने के कारण फूल झड़ने की समस्या उत्पन्न हो जाती है. जिस कारण इसकी पेदावार में भारी कमी आ जाती है. यह फसल अच्छी धूप वाले जगहों पर सही तरह पकती है.आप चाहे तो तेज पत्ते की खेती करके भी लाखों का मुनाफा कमा सकते हैं

टमाटर की फसल के लिए उचित भूमि (Proper land for tomato crop)

Tamatar Ki Kheti अलग-अलग प्रकार की मिट्टियों में कि जा सकती है. इसके लिए रेतीली दोमट से चिकनी काली मृदा और लाल मृदा उचित मात्रा में जल निकास वाली होनी चाहिए. हालांकि, रेतीली दोमट मृदा (मिट्टी ) में जैविक पदार्थ भरपूर मात्रा में उपलब्ध होते है. जिस कारण से यह इस फसल की पैदावार के लिए उपयुक्त मानी जाती है. साथ ही मिट्टी का P.H. मान भी 6-7 के मध्य होना चाहिए |

टमाटर की उन्नत किस्में (Advanced Varieties of tomatoes)

अगर हम बात करे टमाटर की सबसे उन्नत किस्मों के बारे में तो इसमें कई किस्में आती है. जो निम्नलिखित है – टमाटर की उन्नत किस्में

टमाटर की देशी किस्में:टमाटर की हाइब्रिड किस्में
पूसा रूबीपूसा हाइब्रिड-1
पूसा गौरवपूसा हाइब्रिड-2
अर्का विकास पूसा हाईब्रिड-4
पूसा शीतलरश्मि
पूसा-120अविनाश-2
अर्का सौरभ और सोनाली प्रमुख हैं।

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टमाटर की नर्सरी तैयार कैसे करें (How to prepare a tomato nursery)

टमाटर के बीजों को सीधे खेत में नहीं बोया जाता है Tamatar Ki Kheti करने के लिए पहले नर्सरी में लगाकर इसे तैयार किया जाता है जब नर्सरी में पौधे 30-35 दिन के हो जाते हैं तब इन्हें खेत में प्रतिरोपित करना पड़ता हैं। टमाटर की नर्सरी तैयार करने के लिए 12 से 15 सेंटीमीटर उठी हुई क्यारियाँ बनानी पड़ती है जिससे क्यारी में जरूर से ज्यादा पानी न रूके। ध्यान रखें कि क्यारियाँ एक मीटर से ज्यादा चौड़ी न हों जिससे निराई-गुड़ाई, बीज बुआई या सिंचाई करने में कोई असुविधा हो । नर्सरी में 4-5 सेमी की गहराई पर बीज बोएं फिर उन्हें अच्छी तरह से मिट्टी से ढक दें।

टमाटर के पौधों की लम्बाई 4-6 मीटर होनी चाहिये, एक एकड़ के लिए 25 क्यारियाँ तैयार करने की आवश्यकता होती है। बीजों की बुवाई के पहले 7 से 11 ग्राम कार्बोफुरान 3 जी प्रति वर्गमीटर के हिसाब से जमीन में मिला दें और 3 ग्राम केप्टान प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से मिलाकर कर बुवाई करें। टमाटर के बीजों को 5 से 7 सें.मी कि दुरी पर कतारों में बोया जाता है। जैसे ही बीजों का अंकुरण शुरू हो तब कैप्टान के 0.2-03 प्रतिशत घोल से सभी क्यारियों का उपचार करें, नर्सरी में पौधों की फव्वारे से सिंचाई करें।

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टमाटर की बुवाई कब करे (Tomato Sowing)

वैसे तो Tamatar Ki Kheti पूरे वर्ष भर की जा सकती है । शरदकालीन फसल के लिए जुलाई से सितम्बर, बसंत या ग्रीष्मकालीन फसल के लिए नवम्बर से दिसम्बर तथा पहाड़ी क्षेत्रों में मार्च से अप्रैल महीनों में बीज की बुआई फायदेमंद होता है । हमारे देश के उत्तरी मैदानों में शरद एवं बसंत ऋतू में आमतौर पर दो फसलें ली जाती है. अगर हम बात करें, दक्षिणी भारत की तो यहां तीन फसलें ली जाती है. जिनकी बुवाई जून – जुलाई, अक्टूबर – नवंबर और जनवरी – फरवरी में होती है. जबकि पंजाब में केवल बसंत से ग्रीष्म ऋतु मौसम की फसल ली जाती है

टमाटर की फसल के लिए खाद एवं उर्वरक (Manures and Fertilizers for Tomato Crop)

टमाटर ज्यादा फसल लेने के लिए टमाटर की फसल में 100 किलो नाइट्रोजन के साथ 60 किलो स्फूर और 60 किलो पोटाश की आवश्यकता प्रति हेक्टेयर के हिसाब से होती है. . Tamatar Ki Kheti को खाद देते समय ध्यान रहें कि रोपाई के समय नाइट्रोजन देने के लिए यूरिया की जगह आप दूसरी मिश्रित खाद या अमोनियम सल्फेट का प्रयोग कर सकते है या फिर टाप ड्रेसिंग हेतु भी यूरिया का प्रयोग कर सकते हैं.

टमाटर की खेती में खरपतवार कैसे रोके (Weed Control)

हर खेती की तरह Tamatar Ki Kheti करते समय भी खरपतवार की समस्या होती है टमाटर की खेती के साथ कई तरह के खरपतवार उग जाते है. जो टमाटर की खेती को काफी नुकसान पहुंचाते है. इसलिए समय – समय पर अपने खेत में निराई- गुड़ाई करके खेत को अच्छे से साफ रखें

टमाटर की फसल के लिए कीटनाशक का प्रयोग (Use of insecticide for tomato crop)

Tamatar Ki Kheti में सफेद मक्खी विषाणु रोग फैलाती है। साथ ही दुसरे रोग भी होते हैं जिससे टमाटर की खेती को बहुत नुकसान पहुंचता है इस को रोकने के लिए नीम आधारित जैविक दवा जैसे नीम बाण, निम्बेसिडीन आदि को दो मिली डाइमिथोएट 30 ई सी या मैलाथियॉन 50 ईसी एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। आवश्यकता पड़ने पर यह छिड़काव 15 से 20 दिन बाद भी दोहराए

टमाटर कौन से महीने में लगाएं?

वैसे तो देश के अलग अलग भागों में Tamatar Ki Kheti पूरे साल भर होती है सामन्य तौर पर टमाटर की बुवाई अगस्त के अंत या सितंबर के पहले सप्ताह में करना चाहिए । मई में इसकी रोपाई के लिए मार्च और अप्रैल माह में नर्सरी तैयार करें। पौधे की बुवाई अप्रैल और मई माह में करना उचित रहता है।

टमाटर की खेती में कौन सी खाद डालें?

अच्छी गुणवत्ता के टमाटर प्राप्त करने के लिए 10 ग्राम डाई अमोनियम फास्फेट और 1.6-2.1 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति वर्ग मीटर की दर से लगाना चाहिए।

टमाटर की खेती के लिए कौन सा बीज अच्छा है?

वर्तमान समय में देश के कई हिस्सों में Tamatar Ki Kheti करने वाले किसान ज्यादातर टमाटर की अर्का रक्षक किस्म को बहुत पसंद कर रहे हैं इसकी वजह हैं कि एक तो इस किस्म से बंपर पैदावार मिलती है और दूसरी इस किस्म के टमाटर की फसल में रोग बहुत कम लगते हैं इसके अलावा टमाटर की देखी में लगने वाले प्रमुख रोगों से लडऩे की क्षमता अन्य किस्मों से अधिक है।

क्या टमाटर की खेती करने में लाभ हैं?

हां Tamatar Ki Kheti में बहुत लाभ है कई किसान हैं जिन्होंने आधुनिक तकनीक को अपनाकर करोड़ों की कमाई की है टमाटर की खेती से

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